भरत कुलत्थवने, द्वंद्वात्मक इच्छाएँ और घृणा माया से उत्पन्न होती हैं; सभी जीव इस माया में प्रवेश करते हैं जब से उन्होंने आरंभ किया।
भगवान श्री कृष्ण
🌌 कृष्ण कहते हैं, इच्छा और द्वेष के मायाजाल में तुम्हारा मन
कृष्ण कहते हैं सत्य, इच्छा और द्वेष माया से उत्पन्न होते हैं। ये तुम्हारे मन को धुंधला करते हैं।
- माया का बंधन — माया का बंधन तुम्हारे मन को धुंधला करता है।
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।