एक गाँव में रहने वाले सुंदर और उनका परिवार पूर्वजों की मार्गदर्शकता का सम्मान करते हुए जीवन व्यतीत करते थे। त्योहार के दिन, सुंदर ने अपने बच्चों को पूर्वजों की कहानियाँ सुनाईं और उनके बलिदानों को याद दिलाया। बच्चों ने पूर्वजों की साहस को समझा और अपने जीवन में इसे अपनाना शुरू किया।
एक दिन, सुंदर ने अपने बच्चों से कहा, 'हमारे पूर्वजों के बिना, हम इतने समृद्ध नहीं हो सकते थे।' इस पर, बच्चों ने अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए पूजा करने का निर्णय लिया।
उस दिन, उन्होंने एक छोटा दीप जलाया और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इससे उनके मन में शांति बनी रही। इसे समझते हुए, उन्होंने प्रतिदिन पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने की आदत विकसित की।