जब मनुष्य संवेदनाओं की वस्तुओं के बारे में सोचता है, तो वह उन संवेदनाओं की वस्तुओं में एक संबंध विकसित करता है; संबंध उस पर इच्छा उत्पन्न करता है; इच्छा से, क्रोध प्रकट होता है।
भगवान श्री कृष्ण
🔥 भावनात्मक वस्तुओं की पकड़ में, मन की शांति कहाँ?
कृष्ण भावनात्मक वस्तुओं की पकड़ को समझाते हैं। आज की जिंदगी में, यही पकड़ हमें क्रोधित भी करती है।
- इच्छा की शक्ति — इच्छा मन को भ्रमित करती है।
💭 भावनात्मक वस्तुओं की पकड़ में तुम कैसे फंसते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।