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श्लोक : 24 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
यह आत्मा न तो नष्ट की जा सकती है, न ही जलायी जा सकती है; इस आत्मा को सूखने नहीं दिया जा सकता; निस्संदेह, यह आत्मा शाश्वत है, हर जगह फैली हुई है, अपरिवर्तनीय, अचल, शाश्वत है; यह एक समान है।
🌊 तेरी आत्मा अविनाशी है, यह स्थायी है।
कुरुक्षेत्र में कृष्ण आत्मा की स्थिरता को प्रकट करते हैं। अपने भीतर शांति का अनुभव करें।
  • 🔥 अविनाशी आत्मा — भीतर की आत्मा न जलती है, न नष्ट होती है।
💭 तुम्हारा मन कितना स्थिर महसूस करता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।