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श्लोक : 23 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
किसी भी हथियार से इस आत्मा को कभी भी टुकड़ों में नहीं काटा जा सकता; आग से इस आत्मा को कभी भी जलाया नहीं जा सकता; और, इस आत्मा को पानी कभी भी भिगो नहीं सकता; हवा इस आत्मा को कभी भी सुखा नहीं सकती।
🛡️ तुम्हारी आत्मा अविनाशी है, तुम्हारा मन कहाँ है?
कृष्ण आत्मा की अविनाशी प्रकृति को समझाते हैं। हमारा मन भी इसी तरह स्थिर रहना चाहिए।
  • 🔥 अविनाशी आत्मा — भीतर की आत्मा किसी से नष्ट नहीं होती।
💭 क्या तुम्हारा मन आत्मा की तरह स्थिर है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।