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श्लोक : 22 / 28

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
अयोग्य व्यक्तियों को अनुचित स्थान और अनुचित समय पर दिया गया दान; और खराब अपमान के साथ दिया गया दान; वह दान अज्ञानता [तमस] गुण के साथ जुड़ा हुआ कहा जाता है।
🕰️ दान का समय, स्थान, व्यक्ति — तुम्हारा मन कहाँ है?
कृष्ण दान के तीन प्रकार समझाते हैं। अयोग्य व्यक्तियों को गलत समय और स्थान पर दिया गया दान व्यर्थ है। यह मानसिक स्थिति को भ्रमित करता है।
  • गलत समय — गलत समय पर दिया गया दान व्यर्थ है।
💭 तुम्हारा दान कब, कहाँ, और किसे दिया जाता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।