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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 28 / 47

अर्जुन
अर्जुन
कृष्णा, इस प्रकार युद्ध करने के लिए दृढ़ निश्चय के साथ उपस्थित इन रिश्तेदारों को यहाँ देखकर, मेरे हाथ-पैर कांप रहे हैं; मेरा मुँह सूख रहा है।
🤝 अर्जुन की मन की उलझन, तुम्हारे रिश्ते तुम्हारे भीतर क्या करते हैं?
अर्जुन कुरुक्षेत्र में रिश्तों को दुश्मन के रूप में देखता है। यह तुम्हारे मन की कमजोरी को दर्शाता है।
  • 😟 मानसिक दबाव — रिश्ते मन पर दबाव डालते हैं।
💭 क्या तुम्हारे रिश्ते तुम्हें मानसिक दबाव देते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।