यह अनंत आनंद इंद्रियों से परे है; इसे केवल शुद्ध बुद्धि से अनुभव किया जा सकता है; और जो व्यक्ति इसमें दृढ़ रहता है, वह वास्तव में इस यथार्थ अस्तित्व से विमुख नहीं होता है।
भगवान श्री कृष्ण
🧘 कृष्ण की मार्गदर्शन: तुम्हारी मन की शांति कहाँ है?
कृष्ण आनंद की अंतरतम प्रकृति को समझाते हैं। यह इंद्रियों से परे है। इसे शुद्ध मन से अनुभव किया जा सकता है।
- मन की शांति — मन की शांति स्थिरता के आधार पर बढ़ती है।
💭 तुम्हारे मन की शांति तुम्हारी जिंदगी को कैसे बदलती है?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।