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श्लोक : 29 / 42

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
कुछ लोग बाहर निकलने वाली सांस को अंदर आने वाली सांस में रोककर त्याग करते हैं; कुछ अन्य बाहर निकलने वाली सांस को अंदर आने वाली सांस में रोककर त्याग करते हैं; वे सांस के प्रवाह को रोकने और नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं [प्राणायाम].
🌬️ सांस की गति, तुम्हारी मन की शांति की दिशा
कृष्ण सांस के नियंत्रण को समझाते हैं। आज की तनावपूर्ण जिंदगी में, मन की शांति आवश्यक है।
  • 🌪️ मन की उलझन — मन की उलझन सांस के नियंत्रण से कम होती है।
💭 जब तुम अपनी सांस पर ध्यान देते हो तो क्या परिवर्तन देखते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।