यह एकाग्रता और क्रोध है, यह प्रकृति की तृष्णा [राजस] गुण से उत्पन्न होता है; यह सभी बड़े पापों को निगल जाता है; यह इस दुनिया का शत्रु है।
भगवान श्री कृष्ण
🔥 क्रोध और इच्छा तुम्हारी मन की शांति को नष्ट करेंगे
कुरुक्षेत्र में, इच्छा और क्रोध मन को भ्रमित करते हैं। ये तुम्हें गलत निर्णयों की ओर ले जाते हैं।
- क्रोध की बुराई — क्रोध तुम्हारी मन की शांति को भंग करता है।
💭 तुम्हारी जिंदगी में इच्छा और क्रोध कैसे प्रभावित करते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।