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श्लोक : 37 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
शुरुआत में विष के समान और अंत में अमृत के समान होने वाला सुख; आत्मज्ञान से उत्पन्न सुख; ऐसा सुख, गुण [सत्व] के साथ होने का कहा गया है।
🌱 विष की तरह शुरू, अमृत की तरह समाप्त सुख
कृष्ण सुख की सच्चाई बताते हैं। शुरुआत में कठिन, अंत में लाभकारी।
  • 🌿 शुरुआती कठिनाई — शुरुआत में कठिनाई हमारे मन को भ्रमित करती है।
💭 अपने जीवन में दीर्घकालिक सुख कहाँ खोजते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।