वृष्णि कुल के लोगों में, मैं वासुदेव हूँ; पांडवों में, मैं धनंजय हूँ; मुनियों में, मैं व्यास हूँ; और विचारकों में, मैं उसान हूँ।
भगवान श्री कृष्ण
🔍 तुम्हारे जीवन में श्रेष्ठता कहाँ छिपी है?
कृष्ण अपने कई रूपों का उल्लेख करते हैं। तुम्हारे जीवन में कई श्रेष्ठताएँ हैं।
- श्रेष्ठता — तुम्हारी श्रेष्ठता तुम्हारे कार्यों में प्रकट होती है।
💭 तुम्हारे जीवन में श्रेष्ठ क्षण कहाँ दिखाई देते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।