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श्लोक : 22 / 42

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
वापसी से मिलने वाले लाभ में संतोष प्राप्त करने के कारण, द्वंद्वों को पार करने के कारण, और ईर्ष्या से मुक्त होने के कारण, तथा विजय और पराजय में संतुलन बनाए रखने के कारण, वह व्यक्ति कार्य करने के माध्यम से किसी भी चीज़ पर नियंत्रण नहीं रखता है।
⚖️ जीत-हार में संतुलन, तुम्हारी मानसिक शांति कहाँ?
कृष्ण यहाँ संतुलन की बात करते हैं। जीत और हार दोनों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यह हमारी मानसिक शांति को सुनिश्चित करता है।
  • 🧘 संतुलन की खोज — जीत और हार में संतुलन मन को शांत करता है।
💭 क्या आप जीत और हार को समान मानते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।