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श्लोक : 14 / 43

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
शरीर भोजन से बढ़ता है; वर्षा से भोजन संभव होता है; यज्ञ के क्रियाकलाप से वर्षा होती है; यज्ञ क्रिया से उत्पन्न होता है।
🌧️ भोजन की पवित्रता, तुम्हारी मन की शांति का निर्माण करती है
कृष्ण द्वारा कही गई यह भावना प्रकृति के चक्र को समझाती है। अपने जीवन में कर्म के महत्व को समझो।
  • 🌱 कर्म का महत्व — कर्म की निरंतरता जीवन को बढ़ाती है।
💭 तुम्हारे जीवन का कौन सा हिस्सा प्रकृति से जुड़ा है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।