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श्लोक : 1 / 43

अर्जुन
अर्जुन
जनार्दन, केशव, यदि बुद्धि क्रिया से ऊँची है, तो इस भयानक युद्ध में मुझे क्यों प्रेरित कर रहे हो?
🌀 कुरुक्षेत्र के किनारे, तुम्हारा मनोभ्रम कहाँ है?
अर्जुन अपना भ्रम प्रकट करता है। तुम्हारे जीवन में कर्म और ज्ञान का स्थान क्या है?
  • 🤔 मनोभ्रम — भ्रम तुम्हारे मन को विचलित करता है।
💭 तुम्हारे जीवन में कर्म और ज्ञान कैसे जुड़े हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।