No Ads
Language
ज्कुंडली.ai

श्लोक : 49 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
अपने मन की शक्ति से, घृणित और व्यर्थ के कार्यों को निश्चित रूप से दूर रखें; ऐसे मन में पूरी तरह से शरण लें; जो अपने कार्यों के फल की इच्छा करता है, वही दुखी होता है।
🧠 अर्जुन, अपने कर्म के फल को भूलकर कार्य कर
कृष्ण अर्जुन से बिना फल की इच्छा के कार्य करने को कहते हैं। फल की इच्छा दुख देती है।
  • ⚖️ कर्म का धर्म — कर्म का धर्म मन की शांति लाता है।
💭 आप किस कर्म के फल की अधिक अपेक्षा करते हैं?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।