अर्जुन, भौतिक विषयों में, वेदों को प्रकृति के तीन गुणों से जोड़ता है; आत्मा की शुद्ध अवस्था में रह; विपरीत भावनाओं के दुखों से मुक्त हो; हमेशा भलाई में स्थिर रह; प्राप्ति और सुरक्षा से मुक्त हो; आत्मा में स्थिर रह।
भगवान श्री कृष्ण
⚖️ कृष्ण कहते हैं: तुम्हारा मन संतुलित रहे
कृष्ण अर्जुन से बात कर रहे हैं। सांसारिक इच्छाएँ मन की शांति को भंग करती हैं। आत्मा के कल्याण में स्थिर रहना आवश्यक है।
- संतुलन की खोज — यह मन के संतुलन की खोज का क्षण है।
💭 तुम्हारा मन किसके लिए भटक रहा है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।