No Ads
Language
ज्कुंडली.ai

श्लोक : 20 / 72

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
यह कभी जन्म नहीं लेता, यह कभी मरता नहीं; किसी भी समय, यह कभी नहीं था, यह नहीं होगा, या यह होना भी नहीं करेगा; यह जन्महीन, शाश्वत, स्थायी और प्राथमिक है; यह कभी नहीं मारा जा सकता, उसी समय, केवल शरीर ही मारा जाएगा।
🌌 शरीर नष्ट होता है, आत्मा शाश्वत है
कुरुक्षेत्र में कृष्ण आत्मा की शाश्वत प्रकृति को समझाते हैं। इसे समझने पर हमारा भय कम होता है।
  • 🌿 शाश्वत आत्मा — शरीर बदलता है, आत्मा शाश्वत रहती है।
💭 क्या आत्मा की सच्चाई को समझने पर भय कम होगा?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।