कुंठी के पुत्र, भरत कुल के व्यक्ति, सुख और दुःख स्थायी नहीं हैं, वे शीतकाल और ग्रीष्मकाल के आगमन और प्रस्थान की तरह हैं; वे केवल क्षणिक सुख के अनुभवों से प्रकट होते हैं; ऐसे विषयों को सहन करने का प्रयास करें।
भगवान श्री कृष्ण
🌊 सुख-दुख लहरों की तरह, तुम्हारा मन शांत हो
कृष्ण सुख-दुख की सच्चाई बताते हैं। वे स्थायी नहीं हैं। तुम्हारा मन संतुलित रहे।
- सुख-दुख — वे लहरों की तरह आते-जाते हैं।
💭 तुम्हारी जिंदगी में सुख-दुख कैसे बदलते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।