शरीर में मन की चिंता उत्पन्न करने वाले भय के कारण कार्यों को करने से रोकने के द्वारा प्राप्त किया गया त्याग, राजस गुण के साथ है; ऐसा त्याग कभी भी फल नहीं देगा।
भगवान श्री कृष्ण
🔥 कृष्ण कहते हैं भय — तुम्हारा त्याग कहाँ है?
कृष्ण यहाँ भय के त्याग को स्पष्ट करते हैं। भय तुम्हारे कार्यों को रोकता है।
- भय का प्रभाव — भय कार्यों को रोकता है।
💭 तुम्हारा भय तुम्हारे निर्णयों को कैसे प्रभावित करता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।