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श्लोक : 51 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जो अपनी बुद्धि से शुद्धि करता है; जो अपने मन को दृढ़ता से नियंत्रित करता है; जो अपनी क्षणिक सुख की भावनाओं और आनंदों को छोड़ देता है; और जो प्रेम और घृणा को दूर फेंक देता है; ऐसा व्यक्ति पूर्ण ब्रह्म स्थिति को प्राप्त करने वाला माना जाता है।
🧘 कृष्ण कहते हैं: तुम्हारा मन कहाँ नियंत्रण में है?
कृष्ण यहाँ मन के नियंत्रण के महत्व को बताते हैं। आज की दुनिया में, मन की शांति तुम्हारी सफलता की नींव है।
  • 🧠 मन का नियंत्रण — जब मन नियंत्रण में नहीं होता, तो भ्रम बढ़ता है।
💭 तुम्हारा मन कब नियंत्रण खोता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।