पार्थ के पुत्र, धर्म और अधर्म के कार्यों को गलत समझने वाली बुद्धि; आवश्यक कार्यों और अनावश्यक कार्यों को गलत समझने वाली बुद्धि; ऐसी बुद्धि, महान आसक्ति [राजस] गुण के लिए है।
भगवान श्री कृष्ण
🤔 बुद्धि का भ्रम — तुम्हारे कर्मों का परिणाम कहाँ?
कृष्ण धर्म और अधर्म के भ्रम को स्पष्ट करते हैं। आज की दुनिया में, यह तुम्हारे निर्णयों को प्रभावित करेगा।
- भ्रमित बुद्धि — भ्रमित बुद्धि निर्णयों को धुंधला करती है।
💭 तुम्हारे निर्णय कितने स्पष्ट हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।