सही कार्य या गलत कार्य, चाहे जो भी हो, एक व्यक्ति अपने शरीर, मन या वाणी के माध्यम से उन्हें आरंभ करने के लिए, ये पांच कारण ही कारणकर्ता होते हैं।
भगवान श्री कृष्ण
🔍 कृष्ण द्वारा बताए गए पाँच कारण — तुम्हारा प्रयास कहाँ?
कृष्ण के ये शब्द कार्यों की नींव को स्पष्ट करते हैं। तुम्हारे कार्यों की सफलता या असफलता तुम्हारे शरीर, मन, और वाणी के समन्वय में है।
- मानसिक भ्रम — मन के समन्वय से कार्य स्पष्ट होते हैं।
💭 तुम्हारे कार्यों में कौन से कारण अधिक भूमिका निभाते हैं?
✨ Premium में पूरा दृश्य
ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
यह श्लोक आपको 'अभी' क्यों छू गया? कारण यहाँ है।
🔓 लॉगिन करके खोलें
भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।