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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 18 / 24

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
गर्व, शक्ति, अहंकार, लालसा और क्रोध में फंसकर, अभिमानी और अज्ञानी व्यक्ति अपने ही शरीर में निवास करने वाले मुझे नफरत करता है।
🔥 गर्व, अहंकार, क्रोध तुम्हारे मन को भ्रमित करते हैं
गर्व और अहंकार मन को भ्रमित करते हैं। ये तुम्हारी आंतरिक शांति को छिपाते हैं।
  • 💥 गर्व की छाया — गर्व तुम्हारी मन की शांति को भंग करता है।
💭 तुम्हारे मन पर हावी अहंकार कहां से आता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।