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श्लोक : 2 / 20

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
प्रकृति के तीन गुणों को बढ़ाने के माध्यम से वृक्ष की शाखाएँ ऊपर और नीचे बढ़ती हैं; नई शाखाएँ छोटे सुखों की अनुभूतियों द्वारा विकसित होती हैं; मनुष्यों की दुनिया के फलदायी कार्यों के परिणामस्वरूप जड़ें लगातार ऊपर की ओर बढ़ती हैं।
🌳 वृक्ष की शाखाओं की तरह, तुम्हारा मन कहाँ बढ़ रहा है?
कृष्ण प्रकृति को वृक्ष के रूप में दिखाते हैं। तुम्हारा मन बंधनों से नियंत्रित होता है।
  • 🌿 तीन गुण — मन में तीन गुण गहराई से बसे होते हैं।
💭 तुम्हारा मन किन गुणों से अधिक प्रभावित होता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।