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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 38 / 55

अर्जुन
अर्जुन
तू परम देवता है, आदि काल का मानव, ठहरने के लिए सबसे ऊँचा, सच्चा विश्राम स्थान, ज्ञात और अज्ञात; तू ही उच्चतम निवास है; ब्रह्मांड तेरा असीम रूप है।
🌌 अर्जुन ने जो सत्य पाया: तुम्हारा मन कहाँ स्थिर होता है?
अर्जुन कृष्ण को परम देवता के रूप में पहचानते हैं। सोचो, तुम्हारे जीवन का आधार कहाँ है।
  • 🌠 मन की खोज — मन कहाँ स्थिर होता है, यह खोजता है।
💭 तुम्हारा मन किस स्थान पर शांति पाता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।