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श्लोक : 29 / 42

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
सभी आकाशीय नागों में, मैं अनंत हूँ; सभी जलजीवों में, मैं वरुण हूँ; पूर्वजों में, मैं आर्यमन हूँ; और सभी नियंत्रकों में, मैं यमधर्म हूँ।
🌊 तुम्हारे जीवन में दिव्य शक्ति कहाँ प्रकट होती है?
कृष्ण अपनी दिव्य महिमा का वर्णन करते हैं। हमारे जीवन में दिव्यता का अनुभव करना आवश्यक है। जब यह हमारे कार्यों में प्रकट होती है, हमारा जीवन पूर्ण होता है।
  • 🐍 असीम शक्ति — अंदर छुपी शक्ति महसूस होती है।
💭 तुम्हारे जीवन में दिव्य शक्ति कहाँ प्रकट होती है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।