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श्लोक : 11 / 34

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
जब मैं मानव शरीर के रूप में प्रकट होता हूँ, तो अज्ञानी मुझे तुच्छ समझते हैं; सभी मनुष्यों के लिए मैं भगवान हूँ, यह मेरी ब्रह्म प्रकृति को वे नहीं समझते।
👥 कृष्ण मानव रूप में, क्या तुमने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचाना?
जब कृष्ण मानव रूप में प्रकट होते हैं, तो कई लोग उन्हें नहीं पहचानते। हमारे जीवन में भी, हम अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने में असफल होते हैं।
  • 👀 मानव रूप — बाहरी रूप सच्चाई को छुपाता है।
💭 क्या आपने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचाना है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।