मनुष्य को सम्पूर्ण ब्रह्म के बारे में निरंतर चिंतन करना चाहिए; यह सब कुछ जानता है; यह सब में प्राचीन है; यह सब कुछ नियंत्रित करता है; यह परमाणु से भी छोटा है; यह सब कुछ याद रखता है; यह सब कुछ बनाए रखता है; इसका रूप सोचने में असंभव है; इसका रंग सूर्य के समान है; यह अंधकार के परे है।
भगवान श्री कृष्ण
🌞 कृष्ण कहते हैं, क्या तुम्हारा मन ब्रह्म का विचार करता है?
कृष्ण ब्रह्म की पूर्णता पर विचार करने को कहते हैं। यह तुम्हारे मन की शांति का मार्गदर्शक है।
- मन की शांति — विचार तुम्हारे मन को शांत करेगा।
💭 क्या तुम्हारा मन ब्रह्म के प्रकाश को महसूस करता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।