अविनाशी परिपूर्णता को सम्पूर्ण ब्रह्म कहा जाता है; किसी की स्वाभाविक स्थिति जीव आत्मा कहलाती है; सृष्टि से संबंधित चीजें, क्रिया कहलाती हैं; या, जीवों के कल्याण का कारण बनने वाली चीजें क्रिया कहलाती हैं।
भगवान श्री कृष्ण
🔍 कृष्ण कहते हैं, क्या तुमने अपने अंतर्मन की भलाई जानी?
कृष्ण पूर्ण ब्रह्म की व्याख्या करते हैं। क्या तुम्हारे कर्म तुम्हारे अंतर्मन की भलाई के अनुरूप हैं?
- अंतर्मन की भलाई — अंतर्मन की भलाई तुम्हारे कर्मों का मार्गदर्शन करती है।
💭 क्या तुम्हारे कर्म तुम्हारे अंतर्मन की भलाई के अनुरूप हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।