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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 7 / 72

अर्जुन
अर्जुन
कमजोर स्वभाव के कारण, मेरा हृदय बहुत बुरी तरह से हिल गया है; मैं धर्म के मार्ग के बारे में तुमसे पूछता हूँ; जो अच्छा है, उसे विश्वास के साथ कहो; मैं तुम्हारा शिष्य हूँ; मैं तुम्हारे पास शरण लेता हूँ; मुझे मार्गदर्शन करो।
🌀 अर्जुन की उलझन: तुम्हारी मन की शांति कहाँ?
अर्जुन मन की उलझन में हैं। हमारे जीवन की उलझनें भी ऐसी ही होती हैं।
  • 😟 मन की उलझन — मन की उलझन तुम्हारे भीतर को विचलित करती है।
💭 तुम्हारे जीवन में किस स्थिति में मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है?
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ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।