जो अहंकार से मुक्त है; माया से मुक्त है; गलत दुनिया के बंधनों को पार करता है; हमेशा पूर्ण स्थिति में रहता है; इच्छाओं से मुक्त है; और, सुख-दुख के द्वंद्व से मुक्त है; ऐसा संतुलित व्यक्ति अमर स्थान को प्राप्त करता है।
भगवान श्री कृष्ण
🕊️ अहंकार से मुक्त होकर, तुम्हारी मन की शांति कहाँ है?
कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण कहते हैं। तुम्हारा मन अहंकार, माया, बंधनों से मुक्त और पूर्ण होना चाहिए।
- माया की छाया — माया सत्य को छुपाती है।
💭 तुम्हारे जीवन में कौन से बंधन तुम्हें नियंत्रित करते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।