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श्लोक : 18 / 20

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
मैं नष्ट होने वाली चीजों और नष्ट न होने वाली चीजों से परे होने के कारण, मैं उच्चतम हूँ; इसलिए, मैं वेदों में पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता हूँ।
🌿 तेरे अंतर्मन की ऊँचाई, दुनिया के बदलावों से परे
कुरुक्षेत्र में कृष्ण खुद को उच्च बताते हैं। जीवन के बदलावों से परे, शांति पाने में आध्यात्म मदद करता है।
  • 🌌 अंतर्मन की ऊँचाई — अंतर्मन अमर आत्मा की अभिव्यक्ति।
💭 तेरी मन की शांति कब बदलाव से प्रभावित होती है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।