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श्लोक : 16 / 20

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
फल को ध्यान में न रखने वाला; शुद्ध;attachment से मुक्त; दुख से मुक्त; किसी कार्य की शुरुआत में अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करने वाला; ये मेरे भक्त हैं; और ऐसे लोग मुझे बहुत प्रिय हैं।
🕊️ कृष्ण का मार्गदर्शन: आसक्ति रहित कर्म
कृष्ण सच्चे भक्तों के गुणों को बताते हैं। आज की दुनिया में, कर्म के परिणामों की चिंता किए बिना कार्य करना महत्वपूर्ण है।
  • 🌀 आसक्ति रहित — आसक्ति निर्णय को धुंधला करती है।
💭 तुम्हारे कर्मों में कितनी आसक्ति है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।