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श्लोक : 2 / 55

अर्जुन
अर्जुन
कमल के नेत्र वाले, वास्तव में, मैंने मनुष्यों के स्वरूप के लुप्त होने और आपके अविनाशी महत्त्व के बारे में आपसे स्पष्टता से समझा।
🌺 अर्जुन कहते हैं, तुम्हारा असली स्वभाव कहाँ छिपा है?
अर्जुन कृष्ण के असली महत्त्व को पहचानते हैं। आज भी, हम अपने जीवन में सत्य की खोज करते हैं।
  • 🔍 सत्य की खोज — सत्य की खोज तुम्हारे मन को स्पष्ट करेगी।
💭 तुम अपने जीवन में असली गुणों को कैसे प्रकट करते हो?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।