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ज्कुंडली.ai

श्लोक : 10 / 55

संजय
संजय
उस रूप में, उनके पास कई मुंह, कई आंखें, कई अद्भुत चीजें, कई दिव्य आभूषण और कई अस्त्र थे।
👁️ कृष्ण का विश्वरूप, तुम्हारा मन कहाँ खड़ा है?
संजय कृष्ण के विश्वरूप का वर्णन करते हैं। विभिन्न जिम्मेदारियाँ हमारे मन में अलग-अलग भावनाएँ उत्पन्न करती हैं।
  • 🔍 मानसिक भ्रम — कई जिम्मेदारियाँ तुम्हारे मन को भ्रमित करेंगी।
💭 तुम्हारे मन में कई जिम्मेदारियाँ कैसे अलग-अलग भावनाएँ उत्पन्न करती हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।