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श्लोक : 10 / 28

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
योग में स्थिर रहने के द्वारा प्राप्त उसकी अचल मन से, एक व्यक्ति मृत्यु के समय, अपनी भौहों के बीच अपनी सांस को समायोजित करता है, और ब्रह्म को पूरी तरह से प्राप्त करता है; इसके द्वारा, वह निश्चित रूप से दिव्यता प्राप्त करता है।
🧘 कृष्ण कहते हैं, क्या तुम अपने मन की स्थिरता प्राप्त कर सकते हो?
कृष्ण योग के महत्व को समझाते हैं। मन की शांति तुम्हारी यात्रा को स्पष्ट करती है।
  • 🌬️ सांस की शक्ति — सांस तुम्हारे मन की स्थिति को निर्धारित करती है।
💭 तुम्हारा मन कब स्थिर होता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।