इस प्रकार, देखने, सुनने, छूने, ग्रहण करने, खाने, चलने, सोने, सांस लेने, बोलने, छोड़ने, स्वीकार करने, खोलने और बंद करने जैसी गतिविधियों में संलग्न होते समय, सत्य को जानने वाला व्यक्ति वास्तव में सोचता है कि वह ऐसा कुछ नहीं कर रहा है।
भगवान श्री कृष्ण
🌀 कृष्ण द्वारा कही गई कर्मों की सच्चाई, तुम्हारी मन की शांति कहाँ?
कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि केवल शरीर कर्म करता है, आत्मा नहीं। यह तुम्हारे कर्मों में शांति लाएगा।
- सच्चाई की पहचान — सच्चाई की पहचान तुम्हारे मन को शांत करेगी।
💭 आप अपने कर्मों में कितना पहचान पाते हैं?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।