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श्लोक : 6 / 43

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
अर्जुन, लेकिन जो व्यक्ति मन से अपने इंद्रियों को नियंत्रित करना शुरू करता है, और इंद्रिय अंगों से किसी भी संबंध के बिना निस्वार्थ कार्य करता है, वह दूसरों के बीच अकेला खड़ा होता है।
🧘 भावनाओं को नियंत्रित कर, निःस्वार्थ कर्मों में शांति
कृष्ण इस संदर्भ में कहते हैं, मन को नियंत्रित करना चाहिए। हमारे कर्म निःस्वार्थ होने चाहिए।
  • 🌀 मानसिक शांति — इंद्रियों का आकर्षण मानसिक शांति को भंग करता है।
💭 तुम्हारे कर्मों में निःस्वार्थता कितनी है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।