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श्लोक : 33 / 78

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
पार्थ के पुत्र, योग को सच्चे रूप से अपनाने के माध्यम से मन, प्राण, इंद्रियों और क्रियाओं को नियंत्रित करना निश्चित है, यह गुण [सत्व] के लिए उपयुक्त है।
🧘 पार्थ के पुत्र, मन का नियंत्रण तुम्हारी शांति की शुरुआत
कुरुक्षेत्र में मन का नियंत्रण महत्वपूर्ण है। आज की दुनिया में यह शांति प्रदान करता है।
  • 🌀 मन की दृढ़ता — जब मन दृढ़ होता है, स्पष्टता आती है।
💭 तुम्हारा मन कब तुम्हें दृढ़ महसूस होता है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।