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श्लोक : 27 / 27

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
निश्चित रूप से, मैं दिव्यता का आधार हूँ; मैं अविनाशी कण हूँ; मैं शाश्वत धर्म हूँ; और, मैं पूर्ण आनंद हूँ।
🌟 दिव्यता की नींव तुम्हारे भीतर कहाँ है?
कृष्ण स्वयं को दिव्यता की नींव बताते हैं। आज के जीवन में, तुम्हारी मानसिक शांति की नींव क्या है?
  • 🌀 मानसिक शांति — मानसिक शांति तुम्हारे भीतर की नींव है।
💭 तुम्हारे जीवन में दिव्यता की नींव कहाँ है?
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।