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श्लोक : 33 / 42

भगवान श्री कृष्ण
भगवान श्री कृष्ण
लेखनों में, मैं अकार लेख; संयुक्त शब्दों में, मैं संयोग; और, मैं वास्तव में नाशवान समय; मैं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हूँ।
🔍 सत्य के आधार पर, तुम्हारे जीवन की दिशा क्या है?
कृष्ण स्वयं को अक्षर के रूप में वर्णित करते हैं। यह तुम्हारे जीवन की नींव की याद दिलाता है। तुम किस पर विश्वास रखते हो?
  • 🌀 मूल विश्वास — मूल विश्वास तुम्हारे कार्यों को मार्गदर्शन देता है।
💭 तुम्हारे जीवन की नींव क्या होनी चाहिए?
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ज्योतिष मैपिंग + 4 व्याख्याएँ + गहन मार्गदर्शन।
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भगवद गीता की व्याख्याएँ AI द्वारा जनित हैं; उनमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।